• raghav posted an update 3 weeks, 2 days ago

    *पितामह भीष्म के जीवन का एक ही पाप था कि उन्होंने समय पर क्रोध नहीं किया*
    और
    *जटायु के जीवन का एक ही पुण्य था कि उसने समय पर क्रोध किया*

    _”परिणामस्वरुप एक को बाणों की शैय्या मिली और एक को प्रभु श्री राम की गोद_

    *वेद कहता है– “क्रोध भी तब पुण्य बन जाता है, जब वह “धर्म” और “मर्यादा” के लिए किया जाए,*
    और
    *”सहनशीलता” भी तब पाप बन जाती है जब वह “धर्म” और “मर्यादा” को बचा नहीं पाती ||*
    🙏�🌻🌹 *Good EVENING🌹🌻🙏